कोई परवाह नहीं, बस हर साल मरम्मत के नाम पर पैसा करते हैं बर्बाद और अब बहते रहने के लिये बनवा रहे पक्की नाली भी
रिपोर्ट : दिनेश सोलंकी
महू। पिछले २० सालों में अकेला प्रिय पाठक ही ऐसा समाचार पत्र है जो बार बार एमसीटीई महू में स्थित नर्मदा के जल संग्रहण वाली अंग्रेजों के समय से बनाई गई डिक्कियों से रोज २४ घंटों बहने वाले पानी की ओर ध्यान आकर्षण कराता आ रहा है, जिसे लेकर आधुनिक तकनीकि जमाने में सेना इसके बहाव का हल आज तक नहीं खोज पाई है। जबकि भारतीय सेना आधुनिक और तकनीकि हथियारों और युद्ध शैली के लिये विश्व में अपना दम खम रखती है। महू में हर रोज यह देखकर बेहद कोफ्त होती है कि एमसीटीई की प्राचीन पानी संग्रहण की डिक्कियों से लगातार पानी रिस कर हजारों गैलन की मात्रा में २४ घंटों में बह जाता है। ये पानी दो स्थानों से बहता है। एक तो एमसीटीई के मुख्य गेट के पास से होकर निकलता है जो फिर पोस्ट ऑफिस रोड स्थित शिव मंदिर के पीछे से नाले में मुड़कर ऑरफियम सिनेमा से होते हुए राजमोहल्ला, कोयला बाखल, गोकुलगंज, मोतीमहल सिनेमा, यादव मोहल्ला से होते हुए किसनगंज रेलवे और सड़क पुल के नीचे बहने वाले नदीनुमा नाले में मिल जाता है। दूसरी ओर यही पानी सीईडब्ल्यूई ऑफिस के पास से होता हुआ उपवन बगीचे से होकर जनरल्स रोड के नीचे से गुजरता है। इन दोनों बहते हुए पानी को रोकने के लिये हर साल एमसीटीई की डिक्कियों में मरम्मत के नाम पर हजारों -लाखों रुपए खर्च किये जाते हैं जो अपने आप में बड़ा मजाक भी हो सकता है। क्षेत्र में प्रतिदिन सुबह घूमने वाले डॉ महेश तिवारी और ओंकार तिवारी सहित अनेक लोग विस्मित आँखों से इस जल की बर्बादी को होते सालों से देखते आ रहे हैं। डॉ तिवारी का कहना है कि आज हम आधुनिक जमाने में तकनीकि क्षमताओं से आगे बढ़ते जा रहे हैं तो क्या बरसों से बहने और बर्बाद होने वाले जल की बरबादी को रोकने के लिये कोई कारगार उपाय नहीं खोज सकते! क्या २० सालों से अविरल बहने वाले इस जल को हम आगे के २० साल और यॅू ही देखते रहेंगे!बहाव के लिये लाखों रुपए से बनवा रहे हैं पक्की नाली भीअब एक ओर हास्यास्पद और शर्मनाक हरकत पर भी नजर डालिये। एमसीटीई की इन डिक्कियों से बहने वाले नर्मदा जल पर तो रोक नहीं लगाई जा रही है लेकिन इसके ऐसे ही बहते रहने को देखते हुए बकायदा पक्की नाली का निर्माण चालू कर दिया गया है जो बर्बाद होता नर्मदा का पानी अब कच्ची के बजाय पक्की नाली में बहते हुए आगे की ओर जाएगा। याने आगे के सालों में भी नर्मदा का पानी यूूं ही बर्बाद होता रहे, इसके पक्के इंतजाम किये जा रहे हैं। शर्मनाक यह भी है कि २४ घंटे बहने वाले पानी के लिये पक्की नाली कितने दिनों तक टिक पाएगी, इस पर भी विचार नहीं किया जा रहा है, बस पैसा बर्बाद करना है वो भी जल बर्बादी को नियमित बहते रहने के लिये…..ये बहुत अफसोस का विषय होता जा रहा है..! क्या सेना के वरिष्ठ अधिकारी इस पर गौर करेंगे!
