जंगल, अंधेरा और बाढ़ का खतरा… महू के लोगों को 4 महीने की ‘सजा’!
महू में धारनाका पुल निर्माण का काम शुरू होते ही जनता की मुश्किलें भी शुरू हो गई हैं। प्रशासन ने पुल के दोनों ओर जो वैकल्पिक रास्ते बनाए हैं, वे अब लोगों के लिए राहत नहीं बल्कि खतरे का कारण बनते दिखाई दे रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि दोनों रास्ते गंभीर नदी के बीच से होकर निकाले गए हैं, जहां अभी तो सूखा है, लेकिन बरसात शुरू होते ही हालात भयावह हो सकते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने नदी जैसे बड़े बहाव क्षेत्र में केवल दो पाइप डालकर अस्थायी रास्ता बना दिया है, मानो कोई छोटा नाला हो। जबकि गंभीर नदी का इतिहास बाढ़ से जुड़ा रहा है। एक-दो तेज बारिश में ही नदी उफान पर आ जाती है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बरसात के दौरान यह वैकल्पिक मार्ग पूरी तरह बंद हो सकता है और लोगों का संपर्क 10 से 15 दिनों तक कट सकता है।इतना ही नहीं, शहर की ओर जाने वाला दूसरा डायवर्जन रास्ता भी लोगों में डर पैदा कर रहा है। यह रास्ता आबादी के बाद सुनसान और जंगलनुमा इलाके से होकर गुजरता है। करीब एक किलोमीटर लंबे इस हिस्से में न तो स्ट्रीट लाइट है और न ही सुरक्षा व्यवस्था। रात 8 बजे के बाद यहां सन्नाटा छा जाता है। ऐसे में देर रात आने-जाने वालों को लूटपाट और हादसों का डर सताने लगा है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन ने बिना दूरदर्शिता के यह व्यवस्था बना दी। यदि बारिश शुरू हुई तो रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाएगा, वहीं अंधेरे और सुनसान इलाके में अपराध की आशंका भी बढ़ जाएगी।अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन ने सिर्फ पुल निर्माण पर ध्यान दिया और जनता की सुरक्षा व सुविधा को नजरअंदाज कर दिया? वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भारी नाराजगी है और वे सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।• महू से दिनेश सोलंकी की रिपोर्ट
