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नगर निगम के अधीन आते ही बढ़ीं समस्याएं, फायर कर्मी पहुंचे कोर्ट; पार्षद जीतू यादव ने भी उठाए गंभीर सवाल
देश के सबसे स्वच्छ शहर Indore की फायर सेफ्टी व्यवस्था आज खुद बदहाली के दौर से गुजर रही है। कभी पुलिस विभाग के अधीन रहने वाली इंदौर फायर ब्रिगेड अब नगर निगम के जिम्मे आने के बाद संसाधनों, कर्मचारियों और व्यवस्थाओं के संकट से जूझ रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई फायर कर्मियों को अपने हक और वेतन संबंधी समस्याओं के लिए न्यायालय की शरण तक लेना पड़ रही है।जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में फायर ब्रिगेड का संचालन पुलिस विभाग से हटाकर Indore Municipal Corporation के अधीन कर दिया गया था। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि नगर निगम के पास आने के बाद फायर सेवाओं का आधुनिकीकरण होगा, नए फायर स्टेशन खुलेंगे और आधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे। लेकिन दो साल बाद भी हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।16 साल से नई दमकल नहींफायर कर्मचारियों का कहना है कि पुलिस विभाग में रहते समय उन्हें बेहतर प्रशासनिक निगरानी और सुविधाएं मिलती थीं, लेकिन अब निगम व्यवस्था में उनकी समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही। सबसे बड़ी चिंता यह है कि वर्ष 2010 के बाद से इंदौर फायर ब्रिगेड के लिए नई दमकल गाड़ियां खरीदी ही नहीं गईं।आज भी पुराने और जर्जर वाहनों के भरोसे पूरे शहर की सुरक्षा की जा रही है। कई दमकल वाहन तकनीकी खराबियों से जूझ रहे हैं, जिससे आगजनी जैसी आपात स्थितियों में घटनास्थल तक पहुंचने में देरी होती है। तेजी से फैलते शहर और बढ़ती हाईराइज बिल्डिंग्स के बीच यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है।24 घंटे ड्यूटी, सुविधाएं आधीफायर कर्मियों का आरोप है कि वे लगातार 24 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन बदले में पर्याप्त वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रहीं। पुलिस विभाग के अधीन रहते समय जहां 13 माह का वेतन मिलता था, वहीं नगर निगम में केवल 12 माह का भुगतान किया जा रहा है।कर्मचारियों का कहना है कि अतिरिक्त कार्य के बावजूद जोखिम भत्ता और अन्य सुविधाएं समय पर नहीं मिलतीं। कई फायर कर्मी लंबे समय से बीमार हैं, लेकिन उनकी स्वास्थ्य सुविधाओं और उपचार को लेकर भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।भर्ती बंद, कर्मचारी सेवानिवृत्ति के करीबफायर विभाग में वर्षों से नई भर्ती नहीं हुई है। मौजूदा कर्मचारियों में से लगभग 25 कर्मी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं। ऐसे में आने वाले समय में फायर ब्रिगेड में कर्मचारियों की भारी कमी खड़ी हो सकती है।शहर के मध्य क्षेत्र में गांधी हॉल के पीछे संचालित मुख्य फायर स्टेशन की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। यहां मात्र 8 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से कुछ जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं।हाईराइज शहर, लेकिन संसाधन पुरानेइंदौर में पिछले कुछ वर्षों में बहुमंजिला इमारतों और व्यावसायिक परिसरों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन उसी अनुपात में फायर ब्रिगेड का आधुनिकीकरण नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक 70 मीटर ऊंचे हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदने की योजना बनाई गई थी, ताकि ऊंची इमारतों में आग लगने की स्थिति से निपटा जा सके, लेकिन यह योजना अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई।इसके अलावा शहर विस्तार को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में नए फायर स्टेशन स्थापित करने की भी घोषणा हुई थी, लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।नियम क्या कहते हैं?फायर सेफ्टी विशेषज्ञों के अनुसार दमकल वाहनों का नियमित मेंटेनेंस बेहद जरूरी होता है। सामान्य नियमों के तहत फायर वाहनों की फिटनेस जांच, पंप और पाइपलाइन की टेस्टिंग, हाइड्रोलिक सिस्टम का निरीक्षण और वाहनों को हमेशा “रोड रेडी” स्थिति में रखना अनिवार्य माना जाता है।विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 10 से 15 वर्ष पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बदल दिया जाना चाहिए। लेकिन इंदौर में कई दमकल वाहन 15 वर्ष से अधिक पुराने बताए जा रहे हैं। ऐसे में उनकी विश्वसनीयता और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।“जो शहर बचाते हैं, उनकी सुनवाई कौन करेगा?”फायर कर्मियों का कहना है कि आगजनी, दुर्घटना और आपदा जैसी परिस्थितियों में सबसे पहले वही अपनी जान जोखिम में डालते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि अब कुछ फायर कर्मी न्यायालय पहुंच चुके हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में इंदौर की फायर सेफ्टी व्यवस्था बड़े संकट का सामना कर सकती है।पार्षद जीतू यादव ने भी उठाए सवालइसी मुद्दे को लेकर वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद जीतू यादव ने नगर निगम के बजट सम्मेलन में गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि आगजनी की घटनाओं के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए नगर निगम के पास कोई विशेष प्रशिक्षित फायर रेस्क्यू टीम उपलब्ध नहीं है।उन्होंने कहा कि तेजी से फैलते इंदौर में केवल एक प्रमुख फायर स्टेशन पर्याप्त नहीं है। वे पहले भी शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में नए फायर स्टेशन स्थापित करने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।पार्षद यादव ने आशंका जताई कि यदि किसी घनी बस्ती या संकरी कॉलोनी में बड़ी आगजनी की घटना हो जाती है, तो दमकल वाहन समय पर वहां पहुंच भी नहीं पाएंगे, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।इन क्षेत्रों में नए फायर स्टेशन के लिए रखे थे प्रस्ताव:निपानियाकनाड़ियापालदाखंडवा रोडराजेंद्र नगरगांधीनगरदेवास नाकापार्षद यादव ने मांग की कि शहर की बढ़ती आबादी और विस्तार को देखते हुए इन क्षेत्रों में जल्द से जल्द नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी बड़ी आगजनी की घटना से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।बड़े सवाल अब भी कायमआखिर 16 साल से नई दमकल गाड़ियां क्यों नहीं खरीदी गईं?करोड़ों के बजट वाले नगर निगम में फायर ब्रिगेड प्राथमिकता क्यों नहीं बन पाई?हाईराइज शहर बनने के बावजूद आधुनिक उपकरणों की कमी क्यों है?कर्मचारियों की भर्ती और सुविधाओं पर निर्णय कब होगा?क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?फायर सेफ्टी विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरों में आधुनिक फायर सिस्टम, प्रशिक्षित स्टाफ और पर्याप्त संसाधन बेहद जरूरी हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में किसी बड़ी आगजनी की घटना के दौरान हालात भयावह हो सकते हैं।
