
धार। इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में शामिल विभिन्न देशों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों ने शुक्रवार को ऐतिहासिक नगरी मांडू का भ्रमण किया। “पूर्व का शिराज” कहलाने वाले मांडू की ऐतिहासिक धरोहर, 15वीं शताब्दी की स्थापत्य कला और प्राचीन जल संरक्षण प्रणाली ने विदेशी मेहमानों को प्रभावित किया। जिला प्रशासन ने उनका स्वागत मालवी परंपरा, पुष्पवर्षा और आदिवासी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ किया।मांडू पहुंचने पर आदिवासी नृत्य दलों ने पारंपरिक ढोल-थाली की थाप पर आकर्षक प्रस्तुति दी। नृत्य की उमंग में विदेशी मेहमान भी शामिल हुए और कलाकारों के साथ थिरकते नजर आए। जहाज महल के मुख्य द्वार पर आजीविका मिशन की महिलाओं द्वारा लगाए गए बाग प्रिंट स्टॉल का भी प्रतिनिधिमंडल ने अवलोकन किया। मेहमानों ने बाग प्रिंट कला की बारीकियों को समझा और स्वयं भी सांचों के माध्यम से डिजाइन बनाने का अनुभव लिया।प्रतिनिधिमंडल ने जहाज महल सहित मांडू के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। अधिकृत गाइडों ने उन्हें मांडू की 500 वर्ष पुरानी जल प्रबंधन प्रणाली और स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी दी, जिसकी सभी ने सराहना की। जहाज महल परिसर स्थित संरक्षण प्रयोगशाला में पारंपरिक मोर्टार निर्माण प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया गया, जहां अधिकारियों ने इसके निर्माण और उपयोग की जानकारी साझा की।शाम को जहाज महल परिसर में आयोजित भव्य लाइट एंड साउंड शो ने मेहमानों को मांडू के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सम्मान में गाला डिनर का आयोजन किया गया, जिसमें मालवा के पारंपरिक व्यंजनों सहित विभिन्न राज्यों के विशेष पकवान परोसे गए।भ्रमण के बाद विदेशी प्रतिनिधियों ने कहा कि मांडू केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में प्राचीन जल संरक्षण तकनीकों का उत्कृष्ट उदाहरण भी है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan, केंद्रीय राज्य मंत्री Savitri Thakur सहित प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।



