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लखनऊ। अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड की जांच तेज हो गई है। मंगलवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और पूरे भवन को सील कर दिया। फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हादसे के वास्तविक कारणों का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है, हालांकि प्रारंभिक जांच में एसी फटने की आशंका जताई जा रही है।घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात उच्चस्तरीय बैठक कर दोषियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के आदेश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। जांच दल को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।प्रकरण में लापरवाही के प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें बिजली विभाग के एक्सईएन गौरव कुमार, फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह, एलडीए के सहायक अभियंता अनिल कुमार और कनिष्ठ अभियंता प्रमोद पांडे शामिल हैं। वहीं, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।पुलिस ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, पेट शॉप संचालक रामकृष्ण उपाध्याय, एनिमेशन सेंटर संचालक तूशॉक कृष्णा जायसवाल और किरायेदार सुरेश कुमार शाहू को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि नामजद आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला की तलाश जारी है।संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) बबलू कुमार के अनुसार पुरनिया चौकी प्रभारी शुभम तिवारी की शिकायत पर छह नामजद तथा अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं एवं उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।गौरतलब है कि इस दर्दनाक अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब पूरे प्रदेश की नजर एसआईटी और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारों का खुलासा हो सकेगा।
