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आज घोर ताज्जुब हुआ जब महू छावनी परिषद का दल इंजीनियर, सफाई अधिकारी आदि के साथ मालवा कॉम्पलेक्स में घुसकर छोटे शिव मंदिर को तोड़ आया। इस शिव मंदिर को तोड़ने को लेकर अभी तक कोई विवाद, शिकायत सामने नहीं आई थी और न ही इसे तोड़ने से पहले हटाने का कोई नोटिस ही दिया, जैसा कि बोर्ड द्वारा हमेशा दिया जाता हैं और अतिक्रमण हटाते नहीं, न बहु – मंजिला अवैद्य निर्माण तोड़ते हैं, रोकते हैं, लेकिन अचानक किसकी शह पर, गुपचुप शिकायत पर छावनी परिषद ने शनिवार सुबह सुबह जाकर मंदिर को तोड़ने में जल्दबाजी दर्शा दी….। क्या ऐसा करके हिंदू धर्म की आस्था को चोट नहीं पहुंचाई, क्या ऐसा करके हिंदू – मुस्लिम दुकानदारों के बीच वैमनस्यता का बीज नहीं बोया गया है। अगर मंदिर से कोई अवरोध, शिकायत थी तो ये बात समझाईश से भी हल की जा सकती थी। अचानक इतनी हिम्मत, साहस दिखाने की अक्लमंदी क्यों दिखाई गई। मौके पर लिये गए एक वीडियो में सहायक इंजीनियर जवाब दे रहे हैं कि *व्यास (इंजीनियर अमित व्यास) से बात करो, उन्होंने तोड़ने को बोला….* जबकि खुद व्यास वहां नहीं पहुंचे थे। अगर ये इंजीनियर व्यास की हरकत है तो ऐसी हरकत वे महू मार्केट के भीतर अच्छे भले फव्वारे को भी तुड़वाकर भी कर चुके हैं और प्रिंस नर्सरी के बाउंड्री को भी तुड़वा चुके हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इंजीनियर व्यास किसी के कहने पर ऐसी कार्यवाही करते हैं जिससे माहौल गरम हो जाए। उनकी ताजा बेतुकी कार्यवाही के विरोध में सुना है अब मालवा कॉम्प्लेक्स के दुकानदार मोर्चा संभालेंगे। इस मामले में तो खुद सीईओ ज्योति कपूर को सामने आकर विवाद का पटापेक्ष करना चाहिए।
