
प्रदेश में बिजली दरों में एक बार फिर बढ़ोतरी की तैयारी है। बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2026–27 के लिए टैरिफ में 10.19 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग को भेजा है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो आम उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर सीधा असर पड़ेगा।जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में स्मार्ट मीटर लगाने, लाइन लॉस कम करने और बिलिंग-वसूली व्यवस्था मजबूत करने के नाम पर 4700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद कंपनियों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। विधानसभा में भी सरकार ने स्वीकार किया है कि बिजली कंपनियों के सामने अब भी हजारों करोड़ रुपये का राजस्व अंतर बना हुआ है।प्रस्तावित बढ़ोतरी लागू होने पर 150 से 300 यूनिट मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं के बिल में लगभग 150 से 300 रुपये तक अतिरिक्त भार बढ़ सकता है। वहीं 400 यूनिट या उससे अधिक बिजली खर्च करने वाले परिवारों को हर महीने 400 से 600 रुपये तक अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।बिजली कंपनियों का कहना है कि सप्लाई के दौरान भारी नुकसान अब भी बना हुआ है। एटीएंडसी (लाइन लॉस और वसूली नुकसान) 20 से 30 प्रतिशत के बीच है, यानी 100 यूनिट बिजली खरीदने पर 20 से 30 यूनिट की पूरी राशि वसूल नहीं हो पाती। इसके पीछे बिजली चोरी, तकनीकी नुकसान और बिल वसूली में कमी को प्रमुख कारण बताया गया है।दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 2026–27 के लिए कंपनियों ने करीब 6044 करोड़ रुपये का राजस्व अंतर दर्शाया है। ऐसे में घाटे की भरपाई के लिए दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है। अब अंतिम फैसला विद्युत नियामक आयोग के अनुमोदन पर निर्भर करेगा, लेकिन मंजूरी मिलने की स्थिति में आम उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का झटका लगना तय माना जा रहा है।
