
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में जांच कर रहे न्यायिक आयोग के समक्ष कांग्रेस नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने बयान दर्ज कराए। उन्होंने घटना के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए पेयजल गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और समय पर कार्रवाई नहीं होने पर गंभीर सवाल उठाए। साथ ही मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की।मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा गठित एक सदस्यीय आयोग, पूर्व जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में मामले की जांच कर रहा है। आयोग ने अधिक से अधिक साक्ष्य जुटाने के लिए दस्तावेज और जानकारी जमा करने की अंतिम तिथि 1 अप्रैल तक बढ़ा दी है, जबकि अगली सुनवाई 6 अप्रैल को प्रस्तावित है।पिछली सुनवाई में आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अदालत में पेश की थी, जिस पर कोर्ट ने विस्तृत रिपोर्ट के लिए 30 दिन का समय दिया। वहीं सीनियर एडवोकेट अजय बागडिया ने दावा किया कि क्षेत्र के ओवरहेड टैंक में पोटैशियम क्लोराइड की टैबलेट डाली गई थीं, जो अधिकृत प्रक्रिया से नहीं खरीदी गई थीं। इस मामले में निष्पक्ष पुलिस जांच की मांग भी उठाई गई है।इस पूरी घटना में अब तक 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे शहर में आक्रोश बना हुआ है।
