ईद पर बग्गी और विंटेज कार से निकली शहर काजी की सवारी
इंदौर। शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब को दर्शाने वाली एक अनोखी परंपरा आज भी पूरे सम्मान और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। करीब 60 साल पहले शुरू हुई यह परंपरा आज भी लोगों के दिलों में कौमी एकता की मिसाल बनी हुई है।इस परंपरा की शुरुआत इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीति में सक्रिय रहे रामचंद्र सालवाडिया ने की थी। वे हर साल ईद के मौके पर बग्गी लेकर शहर काजी याकूब अली के निवास पहुंचते थे और उन्हें बग्गी में बैठाकर जुलूस के रूप में सदर बाजार स्थित ईदगाह तक लाते थे।याकूब अली साहब के इंतकाल के बाद उनके बेटे डॉ. इशरत अली ने शहर काजी की जिम्मेदारी संभाली और यह सिलसिला लगातार जारी रहा। कुछ वर्ष पहले रामचंद्र सालवाडिया के निधन के बाद उनके पुत्र सत्यनारायण सालवाडिया ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।इस वर्ष इस परंपरा में खास आकर्षण भी देखने को मिला। सत्यनारायण सालवाडिया बग्गी के साथ एक विंटेज कार लेकर शहर काजी के निवास पहुंचे। शहर काजी को विंटेज कार में बैठाकर, जबकि परिजनों को बग्गी में सवार कर, राजमोहल्ला से सदर बाजार ईदगाह तक जुलूस निकाला गया।ईदगाह पहुंचकर शहर काजी ने ईद की नमाज अदा करवाई। इस दौरान पूरे रास्ते लोगों ने इस परंपरा का स्वागत किया और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।यह परंपरा आज भी इंदौर में कौमी एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल बनी हुई है। लोगों ने दुआ की कि इस खूबसूरत परंपरा को किसी की नजर न लगे और यह यूं ही आगे बढ़ती रहे।
