सेविंग अकाउंट 15-20 हजार और करंट अकाउंट 1.50 लाख रुपए तक में बेचते थे आरोपी, लाखों के संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले
इंदौर। साइबर और आर्थिक अपराधों पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0 के तहत थाना विजयनगर पुलिस ने म्यूल बैंक अकाउंट और फर्जी बैंक खातों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 7 एटीएम/डेबिट कार्ड, 6 सिम कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी आर्थिक धोखाधड़ी करने वाले साइबर अपराधियों को अन्य लोगों के नाम से संचालित बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इन खातों के साथ लिंक सिम कार्ड और एटीएम/डेबिट कार्ड भी दिए जाते थे, जिनका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से हासिल रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।खातों की तय थी कीमतप्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सेविंग बैंक अकाउंट करीब 15 से 20 हजार रुपए और करंट अकाउंट 1 लाख से 1.50 लाख रुपए तक में खरीदते-बेचते थे। जांच में आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में लाखों रुपए के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी खुद भी अपने बैंक खातों को अन्य लोगों को उपलब्ध कराते थे। मोबाइल फोन की जांच में बैंक खातों की अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।तीनों आरोपियों को पुलिस रिमांडमुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दिलीप पिता राजाराम कुशवाह (47), विश्वराज सिंह झाला (26) और इंदौखंसराज मोदी (20) को गिरफ्तार किया है।थाना विजयनगर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 878/2026 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस और 66C आईटी एक्ट में मामला दर्ज किया है। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से 5 दिन का पुलिस रिमांड मिला है।रिमांड के दौरान पुलिस म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले लोगों, खरीदारों, संबंधित बैंक खातों, सिम कार्ड और फ्रॉड की रकम के ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने की भी उम्मीद है।यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, डीसीपी जोन-2 अमन सिंह राठौड़, एडीसीपी अमरेंद्र सिंह और एसीपी विजयनगर पराग सैनी के निर्देशन में थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल की टीम द्वारा की गई।
