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रात 2 बजे सड़क किनारे खड़े कार्यकर्ताओं से मिलने रुके सीएम शुभेंदु अधिकारी
रात गहरी हो चुकी थी। घड़ी में करीब 2 बज रहे थे, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ था। कई जगहों पर कार्यकर्ता सड़क किनारे कतार में खड़े थे, सिर्फ एक झलक पाने के लिए।चेहरों पर खुशी थी, आंखों में अपनापन… लेकिन दिल में एक डर भी था — कहीं जिम्मेदारियों के बड़े पद पर पहुंचने के बाद “दादा” उन्हें भूल न जाएं।इसी बीच जैसे ही सीएम शुभेंदु अधिकारी का काफिला वहां पहुंचा, अचानक गाड़ियां रुक गईं। दादा खुद नीचे उतरे और एक-एक कार्यकर्ता से मुलाकात की। किसी का हाथ थामा, किसी के कंधे पर हाथ रखा, तो किसी की बात मुस्कुराकर सुनी।उस पल वहां मौजूद कई कार्यकर्ताओं की आंखें नम हो गईं।उन्हें लगा कि पद भले बड़ा हो गया हो, लेकिन अपने लोगों के लिए दादा आज भी वैसे ही हैं।रात के सन्नाटे में हुई यह मुलाकात सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनाओं और रिश्तों की मिसाल बन गई।
