Oplus_131072
पार्षद की कथित लापरवाही पर उठे सवाल, बड़ा हादसा टला; 4 लोग झुलसे, 5000 से ज्यादा गैस कनेक्शन प्रभावित
इंदौर। विजय नगर क्षेत्र के सुमन नगर जैन मंदिर के पास मंगलवार को हुआ गैस पाइपलाइन विस्फोट केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस स्थान पर बोरिंग का कार्य चल रहा था, वहां आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। इसी दौरान हाई-प्रेशर गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और कुछ ही देर में आग की भयावह लपटें उठने लगीं।हादसे में चार लोग झुलस गए, जिनमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर राजकुमारी झाला भी शामिल हैं। उनकी बाइक भी आग की चपेट में आकर पूरी तरह जल गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि आग कुछ और मिनट तक फैलती या आसपास खड़े वाहनों और मकानों तक पहुंच जाती, तो यह इंदौर के सबसे बड़े शहरी हादसों में से एक साबित हो सकता था।अनुमति ली होती तो टल सकता था हादसाअवंतिका गैस लिमिटेड के अधिकारियों ने साफ कहा है कि बोरिंग या खुदाई कार्य के लिए कंपनी से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। जबकि क्षेत्र में हर 20 मीटर पर चेतावनी बोर्ड लगे हुए हैं, जिन पर हाई-प्रेशर गैस पाइपलाइन होने की जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित है। इसके बावजूद खुदाई किए जाने से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।कंपनी के इंजीनियर अनुराग शर्मा ने बताया कि बिना अनुमति खुदाई सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। फिलहाल गैस आपूर्ति बहाल करने का काम किया जा रहा है, लेकिन पूरे मामले की जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।पार्षद की भूमिका पर सवालघटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि आखिर किसके निर्देश पर बोरिंग और खुदाई का काम किया जा रहा था। प्रारंभिक जानकारी में स्थानीय पार्षद बालमुकुंद सोनी का नाम सामने आया, हालांकि उन्होंने खुद को इससे अलग बताते हुए कहा कि नगर निगम द्वारा वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य कराया जा रहा था और घटना के समय वे घर पर थे।इसके बावजूद स्थानीय रहवासियों का सवाल है कि यदि कार्य सार्वजनिक था तो सुरक्षा मंजूरियां और गैस कंपनी की अनुमति क्यों नहीं ली गई? क्या संबंधित एजेंसियों ने पाइपलाइन की मौजूदगी की जांच की थी? यदि नहीं, तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।शहर के लिए चेतावनीविशेषज्ञों का मानना है कि शहर में भूमिगत गैस, बिजली और पानी की लाइनों के बीच किसी भी प्रकार की खुदाई बिना तकनीकी अनुमति के कराना खतरनाक साबित हो सकता है। विजय नगर का यह हादसा इसी लापरवाही का परिणाम माना जा रहा है।जांच और कार्रवाई की मांगघटना के बाद रहवासियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि चार लोग झुलस गए, हजारों परिवारों की गैस आपूर्ति बंद हो गई और पूरे इलाके में दहशत फैल गई। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो जान-माल का नुकसान कई गुना अधिक हो सकता था।
