अंधेरे और संकेतकों की कमी से डिवाइडर में घुसी कार
(अभिषेक यादव)इंदौर। एमआर-10 से भानगढ़ तक बना सड़क मार्ग अब लोगों की जान से खिलवाड़ करता नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क आज भी अधूरी पड़ी है। रात होते ही पूरा रास्ता अंधेरे में डूब जाता है। न स्ट्रीट लाइट, न रिफ्लेक्टर, न चेतावनी बोर्ड और न ही डेड एंड की कोई सूचना। ऐसे में बारिश के मौसम में यह रोड किसी ‘डेथ ट्रैप’ से कम नहीं है।शनिवार रात तिरुमला प्राइड निवासी मनोज राजपूत अपनी 60 वर्षीय मां को रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए 10 वर्षीय बेटी के साथ निकले थे। लेकिन भानगढ़ रोड पर बने डेड एंड पुल के पास घने अंधेरे और संकेतकों के अभाव में उनकी कार सीधे सड़क के बीच बने डिवाइडर में जा घुसी। हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।इस दुर्घटना में मनोज की 60 वर्षीय मां के सिर में गंभीर चोट आई, जिन्हें 3 से 4 टांके लगाने पड़े। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जबकि स्थानीय रहवासियों ने 10 वर्षीय बच्ची को सुरक्षित घर पहुंचाया। गनीमत रही कि इस बार किसी की जान नहीं गई।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर निगम किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन हर घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ औपचारिकता निभाते हैं। हालात आज भी जस के तस हैं। सड़क को आधा-अधूरा बनाकर छोड़ दिया गया, सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम नहीं किए गए और रात में बीच सड़क पर वाहनों की अवैध पार्किंग अलग से दुर्घटनाओं को न्योता देती है।हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग पर नगर निगम का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और कचरा ट्रांसफर स्टेशन स्थित है। अधिकारियों का रोज आना-जाना रहता है, लेकिन सड़क की बदहाली, अंधेरा और सुरक्षा इंतजामों की कमी शायद उनकी नजर में नहीं आती।रहवासियों का कहना है कि यदि नगर निगम और संबंधित ठेकेदार की लापरवाही पर जल्द लगाम नहीं लगी, तो अगली खबर सिर्फ दुर्घटना की नहीं, बल्कि किसी बड़ी जनहानि की हो सकती है। अब देखना यह है कि निगम हादसों से सबक लेता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है।
