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महाकाल समिति के बटुकों ने संभाली जिम्मेदारी
उज्जैन। रामघाट पर शुक्रवार शाम रोजाना होने वाली शिप्रा आरती को लेकर प्रशासन और तीर्थ पुरोहित आमने-सामने आ गए। करीब 11 साल से शिप्रा किनारे आरती कराते आ रहे तीर्थ पुरोहितों ने महाकाल मंदिर समिति के बटुकों को आरती की जिम्मेदारी दिए जाने का विरोध किया।शुक्रवार शाम करीब 6 बजे महाकाल मंदिर समिति के बटुक आरती की तैयारी के लिए रामघाट पहुंचे। पाट बिछाने को लेकर पुरोहितों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। विवाद की स्थिति को देखते हुए एसडीएम एलएन गर्ग, पवन बारिया और महाकाल थाना पुलिस का बल घाट पर मौजूद रहा।करीब आधे घंटे तक दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी रही। प्रशासन ने पुरोहितों को समझाने का प्रयास किया और दोनों को साथ आरती कराने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन पुरोहित इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने पुरोहितों को घाट से हटाया और महाकाल मंदिर समिति के बटुकों से आरती कराई।पंडा समिति के राजेश त्रिवेदी ने कहा कि वर्ष 2015 से तीर्थ पुरोहित लगातार शिप्रा आरती कराते आ रहे हैं। उनका कहना है कि 11 साल बाद अचानक आरती की जिम्मेदारी महाकाल मंदिर समिति को देना पुरोहितों को परंपरा से अलग करने जैसा है। उन्होंने आगे भी तीर्थ पुरोहितों द्वारा शाम की आरती कराए जाने की बात कही।वहीं, एसडीएम पवन बारिया ने कहा कि महाकाल प्रबंध समिति की ओर से शिप्रा आरती के स्वरूप में नवाचार किया जा रहा है। हरिद्वार की गंगा आरती की तर्ज पर शिप्रा नदी के किनारे भव्य आरती शुरू करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि किसी को हटाने की बात नहीं है।इससे पहले गुरुवार को भी दोनों पक्षों ने अलग-अलग आरती की थी। महाकाल मंदिर समिति के बटुकों ने घाट के एक हिस्से में आरती की, जबकि पंडा समिति के पुरोहितों ने अपनी निर्धारित जगह पर आरती कराई थी।
