खबर सत्याग्रह | इंदौर
हाईकोर्ट के आदेशों में सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर यातायात में बाधा बनने वाले होर्डिंग व अन्य ढांचों को लेकर स्थिति स्पष्ट है। इसके बावजूद इंदौर के रसोमा चौराहे पर सड़क रोककर लगाया गया गेट नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहा है। गेट मेदांता अस्पताल की ओर जाने वाले मार्ग पर लगा है, जहां दिनभर भारी यातायात रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि विजयनगर झोन कार्यालय से महज कुछ कदम की दूरी पर यह गेट लगा होने के बावजूद नगर निगम का अमला इसे हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा? चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस का बूथ मौजूद है और विजयनगर थाना भी नजदीक है। ऐसे में अधिकारियों और पुलिस की नजर से यह गेट कैसे बचा हुआ है, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस मार्ग से मेदांता अस्पताल, रजिस्ट्रार कार्यालय और रिंग रोड की ओर जाने वाले वाहन गुजरते हैं। इसके अलावा मंगल सिटी के पीछे जाने वाला रास्ता और आसपास की रहवासी बस्तियां भी इसी मार्ग से जुड़ी हैं। सड़क पर गेट लगाए जाने के बाद वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने और यातायात दबाव बढ़ने की बात सामने आ रही है।
नगर निगम शहर में सड़क पर अड़ंगा बनने वाले गुमटियों, ठेलों और अन्य अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है। ऐसे में रसोमा चौराहे पर सड़क घेरकर लगाए गए इस गेट को लेकर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब सवाल सीधा है—जब हाईकोर्ट के आदेश सड़क पर बाधा खड़ी करने वाले ढांचों को लेकर स्पष्ट हैं, तो रसोमा चौराहे पर लगा यह गेट अब तक क्यों नहीं हटाया गया? क्या नियम यहां भी लागू होंगे या गेट लगाने वालों के सामने निगम का अमला बेबस नजर आएगा?
