इंदौर। लंबे इंतजार के बाद इंदौर-महू क्षेत्र की पहचान बन चुका हेरिटेज ट्रेन का सफर आज शनिवार से फिर शुरू हो गया है। ट्रेन के ट्रायल रन के बाद अब पर्यटक 155 साल पुराने मीटर गेज ट्रैक पर प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक विरासत का आनंद ले सकेंगे।महू से कालाकुंड तक करीब किलोमीटर का यह सफर अपने आप में बेहद खास है। रास्ते में ट्रेन तीन सुरंगों, पहाड़ों, नदियों, झरनों और अंग्रेजों के जमाने के रेलवे ब्रिज से होकर गुजरती है। ट्रेन में बैठे यात्रियों को पातालपानी झरने का मनोहारी दृश्य भी देखने को मिलता है। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के बीच से गुजरता यह ट्रैक यात्रा को और रोमांचक बना देता है।देश का सबसे पुराना पहाड़ी रेलवे ट्रैकमहू-कालाकुंड ट्रैक को देश के सबसे पुराने पहाड़ी रेलवे ट्रैकों में गिना जाता है। करीब 155 साल पुराने इस मीटर गेज ट्रैक पर चढ़ाई के कारण ट्रेन कई स्थानों पर धीमी गति से चलती है। पातालपानी से कालाकुंड के बीच चढ़ाई अधिक होने के कारण ट्रेन को कई जगह रुकना भी पड़ता है।इसी मार्ग पर क्रांतिकारी टंट्या मामा की समाधि भी स्थित है। अंग्रेजों के दौर की इंजीनियरिंग आज भी कायमइस ऐतिहासिक ट्रैक के निर्माण में होलकर राजवंश ने भी आर्थिक सहयोग दिया था। उस दौर में पहाड़ों तक रेलवे की पटरियां पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। बताया जाता है कि पटरियों और निर्माण सामग्री को पहाड़ी इलाकों तक पहुंचाने के लिए हाथियों का इस्तेमाल किया गया था।पातालपानी के पास बरसाती नदी पर बनाया गया रेलवे ब्रिज उस दौर की इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है, जो आज भी इस ऐतिहासिक ट्रैक का हिस्सा है।पहले यह रेल मार्ग कालाकुंड से आगे ओंकारेश्वर तक जाता था, लेकिन अब ओंकारेश्वर के लिए अलग ब्रॉडगेज रेलवे लाइन विकसित की जा रही है। ऐसे में 155 साल पुराने इस ट्रैक को हेरिटेज ट्रेन के लिए संरक्षित रखा गया है।आज से शुरू हुए इस सफर के साथ एक बार फिर पर्यटक इतिहास, रोमांच और प्रकृति के अनोखे संगम का आनंद ले सकेंगे।
