इंदौर। फैमिली कोर्ट इंदौर में प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह के खिलाफ अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इंदौर अभिभाषक संघ के सदस्यों ने न्यायालय में वकीलों के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, अपमानित करने और प्रताड़ित करने के आरोपों को लेकर विरोध जताया। इस दौरान संस्था पौरुष इंदौर ने भी अधिवक्ताओं के समर्थन में प्रदर्शन किया और न्यायालय के मुख्य द्वार पर नारेबाजी की।संस्था पौरुष के अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया कि वकीलों के साथ कथित अन्याय के विरोध में संस्था ने अधिवक्ताओं का समर्थन करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि अब तक संस्था पुरुषों के साथ न्यायालयों में कथित दुर्व्यवहार और अपमान के मामलों को लेकर आवाज उठाती रही है। अब अधिवक्ताओं के साथ भी इस तरह की घटनाएं सामने आने की बात कही जा रही है, जिसका संस्था पुरजोर विरोध करती है।प्रदर्शन के दौरान संस्था पौरुष के सदस्यों ने अधिवक्ताओं के सम्मान और न्यायपूर्ण व्यवहार की मांग करते हुए कई नारे लिखे पर्चे वितरित किए। इन नारों में “अगर न्याय की बात है, हम एडवोकेट्स के साथ हैं”, “मत ज्यादा अभिमान करो, अधिवक्ताओं का सम्मान करो” और “न्याय करो, अन्य नहीं” जैसे संदेश शामिल थे।इसके अलावा, संस्था की ओर से “तुम मत हम पर अहसान करो, विक्टिम्स का सम्मान करो” तथा न्यायालयों में संबोधन की भाषा को लेकर “नो मी लॉर्ड, नो योर लॉर्डशिप, ओनली श्रीमान, ओनली महोदय” जैसे नारे भी लगाए गए। आंदोलन में शामिल अधिवक्ताओं ने इन नारों वाले पर्चों को हाथोंहाथ लिया और प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की।दशोरा ने कहा कि न्याय व्यवस्था में सभी के सम्मान और गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। किसी भी पक्ष के साथ अपमानजनक व्यवहार की शिकायत सामने आने पर उस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। संस्था का उद्देश्य ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष के साथ खड़े होकर सम्मानजनक व्यवहार की मांग करना है।इस दौरान अभिभाषक संघ के पदाधिकारियों ने संस्था पौरुष की पहल और अधिवक्ताओं को दिए गए समर्थन की सराहना की। प्रदर्शन के जरिए अधिवक्ताओं के सम्मान, न्यायालयों में मर्यादित व्यवहार और शिकायतों के उचित निराकरण की मांग उठाई गई।
