भोपाल में राजनीतिक हलकों में उस समय हल्की मुस्कान तैर गई, जब एक पत्रकार ने सवाल दाग दिया “कैलाश जी, ऐसा नहीं लगता कि पिछले एक–डेढ़ महीने से आपकी जुबान पर शनि बैठा हुआ है?” सवाल में तंज भी था और इशारा भी।इस पर नेता जी ने भी बिना गंभीरता ओढ़े चुटीले अंदाज़ में जवाब दिया—“किसी ज्योतिष से पूछूंगा यार।”राजनीति में अक्सर बयान सुर्खियां बनाते हैं और कभी-कभी चुप्पी भी। ऐसे में ‘शनि’ वाला सवाल दरअसल हालिया बयानों और उनके असर की ओर संकेत था। जवाब भले हल्का-फुल्का रहा हो, लेकिन यह साफ है कि सियासत में ग्रह-नक्षत्र से ज्यादा असर शब्दों का होता है।भोपाल की फिजाओं में यह संवाद अब चर्चा का विषय है—क्या सचमुच जुबान पर शनि है, या फिर सियासत का मौसम ही कुछ ऐसा चल रहा है?
