इंदौर। खातीवाला टैंक क्षेत्र में अवैध निर्माण पर नोटिस देने गए नगर निगम कर्मचारी को बर्खास्त किए जाने के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। बर्खास्त दरोगा यतींद्र यादव ने मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी। आवेदन में उन्होंने लिखा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिल सकता तो उन्हें जीने का अधिकार भी नहीं है।यादव ने अपने आवेदन में कहा कि वह पिछड़ा वर्ग (OBC) से हैं, इसलिए उन्हें न्याय मिलने की संभावना कम है। नौकरी जाने के बाद उनका परिवार गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। समाज में ताने मिलने से मानसिक पीड़ा लगातार बढ़ रही है।घटना 23 दिसंबर 2024 की बताई जा रही है, जब निगम के जोन-12 में पदस्थ दरोगा यतींद्र यादव खातीवाला टैंक स्थित एक मकान पर अवैध निर्माण का नोटिस देने पहुंचे थे। आरोप है कि स्थानीय पार्षद कमलेश कालरा ने उन्हें नोटिस तामील नहीं करने दिया और गाली-गलौच करते हुए वापस भेज दिया। बाद में नोटिस चस्पा करने की कोशिश भी विफल कर दी गई। इस दौरान कथित रूप से गालियों का ऑडियो भी वायरल हुआ था।यादव को 29 सितंबर 2025 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उस समय कार्रवाई का कारण सोशल मीडिया पर निगम अधिकारियों के खिलाफ पोस्ट करना बताया गया था। बर्खास्तगी तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसौनिया के आदेश पर हुई थी।यादव का कहना है कि नौकरी छिनने से उनके परिवार पर गहरा असर पड़ा है। माता-पंजिता, पत्नी और दो बच्चों के भरण-पोषण में कठिनाई हो रही है, वहीं समाज में अपमान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पिता भी निगम में ईमानदारी से सेवा दे चुके हैं, लेकिन अब पूरा परिवार मानसिक तनाव में है।यादव ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में निगम की एक अधिकारी ने फोन कर उनसे पार्षद के खिलाफ शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया। इनकार करने पर कथित रूप से अपशब्द कहे गए।फिलहाल इस संवेदनशील मामले ने प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनसुनवाई में दिया गया इच्छामृत्यु का आवेदन चर्चा का विषय बना हुआ है।
