इंदौर। पुलिस के जोन-3 द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “नई उम्मीद” के तहत आयोजित 21वें काउंसलिंग सत्र में 32 नशे से पीड़ित युवाओं ने भाग लेकर नशा छोड़ने और सामान्य जीवन की ओर लौटने का संकल्प लिया। पुलिस की इस मानवीय पहल का उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण नहीं, बल्कि भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।कार्यक्रम का आयोजन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (जोन-3) रामसनेही मिश्रा के मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान सहायक पुलिस आयुक्त (हीरा नगर) रुबीना मिजवानी, थाना प्रभारी हीरानगर सुशील पटेल, काउंसलिंग समिति के सदस्य डॉ. पीयूष द्विवेदी एवं अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।काउंसलिंग सत्र के दौरान अधिकारियों ने राहुल, कुलदीप, राधेश्याम, अभय, रवि और लाल सिंह सहित अन्य युवाओं से व्यक्तिगत चर्चा की। युवाओं ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से नशे की लत से जूझ रहे थे, लेकिन पुलिस के सहयोग, मार्गदर्शन और सकारात्मक व्यवहार से अब वे बेहतर जीवन की ओर बढ़ना चाहते हैं।हीरानगर थाना पुलिस द्वारा शिक्षा के प्रति रुचि रखने वाले बच्चों को शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की गई। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें नियमित रूप से काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़कर सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करने का प्रयास किया।विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने चर्चा के दौरान पाया कि युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ने के पीछे परिवार में नशे का माहौल, आर्थिक कमजोरियां, गलत संगति और सामाजिक परिवेश जैसे कारण प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं।इंदौर पुलिस इस अभियान के तहत केवल परामर्श ही नहीं दे रही है, बल्कि नशे से मुक्त होने के इच्छुक युवाओं को मनोरोग विशेषज्ञों के माध्यम से निशुल्क चिकित्सीय उपचार भी उपलब्ध करा रही है, जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होकर समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।पुलिस अधिकारियों ने कहा कि “नई उम्मीद” अभियान का उद्देश्य युवाओं को अपराध और नशे के रास्ते से हटाकर उन्हें एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर करना है। यह पहल नशामुक्त समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
